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तेरी ख़ुशरंग उदासी में



तेरी ख़ुशरंग उदासी में जो सन्नाटा है
मैं उसको अपने कहकहों से आ गुलज़ार करूँ
तेरी ये शर्त कि बस एक बार मिलना हो
मेरी ये जि़द है कि बस एक बार प्यार करूँ
इश्क़ मैंने किया पाक़ीज़ा इबादत की तरह
और दुनिया ने मुझे समझा तिजारत की तरह
मेरे अन्दर हूँ, मैं दुनिया से यूँ महफ़ूज़ मगर
शोहरतें राह में लटकीं इबारत की तरह

तुम्हारे होने से किस-किस को आस क्या-क्या


तुम्हारे होने से किस-किस को आस क्या-क्या है
तुम्हारी आम सी बातों में ख़ास क्या-क्या है
ये तुम ने हम को सिखाया है अपने होने से
भले वो कोई हो इन्सां के पास क्या-क्या है
एक पहाड़े सा मेरी उँगलियों पे ठहरा है
तेरी चुप्पी का सबब क्या है? इसे हल कर दे
ये फ़क़त लफ़्ज हैं तो रोक दे रस्ता इन का
और अगर सच है तो फिर बात मुकम्मल कर दे
मेरी आँखों से ये छाला नहीं जाता मौला
इनसे तो ख़्वाब भी पाला नहीं जाता मौला
बख़्श दे अब तो रिहाई मेरे अरमानों को
मुझ से ये दर्द संभाला नहीं जाता मौला
खेल एहसास के, इनाम में सिक्के औ हवस
आप ही खेलिए हम से नहीं खेले जाते
मुंबई तुझसे मुहब्बत तो है मुझको लेकिन
इस मुहब्बत के तक़ाज़े नहीं झेले जाते

वो नज़ारे जो कभी शौक़-ए-तमन्ना



वो नज़ारे जो कभी शौक़-ए-तमन्ना थे मुझे
कर दिए एक नज़र मे ही पराये उसने
रंग-ए-दुनिया भी बस अब स्याह और सफ़ेद लगे
मेरी दुनिया से यूँ कुछ रंग चुराए उस ने

भ्रमर कोई कुमुदुनी पर


भ्रमर कोई कुमुदुनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का
मैं किस्से को हकीक़त में बदल बैठा तो हंगामा


समंदर पीर का अन्दर है


समंदर पीर का अन्दर है, लेकिन रो नही सकता 
यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता 

मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले 
जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता 

मोहब्बत एक अहसासों की



                    मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है
                    कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है 
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं 
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है

किसी पत्थर में मूरत है


किसी पत्थर में मूरत है कोई पत्थर की मूरत है
लो हमने देख ली दुनिया जो इतनी ख़ूबसूरत है
ज़माना अपनी समझे पर मुझे अपनी खबर ये है
तुम्हें मेरी जरूरत है मुझे तेरी जरूरत है

तेरी उम्मीद तुझे मिल जाए



                                  तेरी दुनिया, तेरी उम्मीद तुझे मिल जाए
चाँद! इस बार तेरी ईद तुझे मिल जाए
जिसकी यादों में चिराग़ों सा जला है शब-भर
उस सहर-रुख़ की कोई दीद तुझे मिल जाए

देवदास मत होना


खुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना
इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना
देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना
ये सारे खेल हैं, इनमें उदास मत होना
जो भी तुम चाहो, फ़क़त चाहने से मिल जाए
ख़ास तो होना, पर इतने भी ख़ास मत होना
किसी से मिल के नमक आदतों में घुल जाए
वस्ल को दौड़ती दरिया की प्यास मत होना


मेरा वजूद फिर एक बार बिखर जाएगा
ज़रा सुकून से हूँ, आस-पास मत होना

खुद को आसान कर रही हो ना


खुद को आसान कर रही हो ना
हम पे एहसान कर रही हो ना
ज़िन्दगी हसरतों की मय्यत है
फिर भी अरमान कर रही हो ना
नींद, सपने, सुकून, उम्मीदें
कितना नुक्सान कर रही हो ना
हम ने समझा है प्यार, पर तुम तो  
जान-पहचान कर रही हो ना 

बात करनी है, बात कौन करे


बात करनी है, बात कौन करे
दर्द से दो-दो हाथ कौन करे
हम सितारे तुम्हें बुलाते हैं 
चाँद ना हो तो रात कौन करे
हम तुझे रब कहें या बुत समझें 
इश्क में जात-पात कौन करे


जिंदगी भर कि कमाई तुम थे 
इस से ज्यादा ज़कात कौन करे

माँ पालती है


माँ
पालती है
पेड़ एक
लाड़ से
प्यार से
दुलार से।
माँ सुलाती है
लोरी गा
पिलाती है दूध
लुटाती है
तन मन प्राण
पेड़
होता बड़ा ज्यों-ज्यों
जड़ें
उसकी मजबूत
घुस जाती हैं
माँ में
हाथ पैर में
दिमाग में
और दिल में
चूसता है
ख़ून-पानी-माँस
महँगे आँसू
पेड़ पाता
विस्तार अद्भुत
देखता संसार
रूककर राह में
कितना बड़ा है पेड़
कितना लम्बा है पेड़
पेड़ बढ़ता
निस दिन
माँ से धँसी
जड़ों से
दूर होता
निस दिन!

सारे गुलशन में तुझे



"सारे गुलशन में तुझे ढूंढ के मैं नाकारा 
अब हर एक फूल को ख़ुद अपना पता देता हूँ
कितने चेहरों में झलक तेरी नज़र आती है
कितनी आँखों को मैं बेबात जगा देता हूँ..."(कुमार विश्वास) 

मैं तेरा ख़्वाब तो जी



"मैं तेरा ख़्वाब तो जी लूँ मगर लाचारी है 
मेरा ग़ुरूर मेरी ख़्वाहिशों पर भारी है 
सुबह के सुर्ख़ उजाले से तेरी माँग सजी 
मेरे तो सामने ये स्याह रात सारी है..."(कुमार विश्वास) 

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