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आंखें कभी बंद न हो
सांस रूक जाए मगर आंखें कभी बंद न हो
मौत आए भी तो तुझे देखने की जिद खत्म न हो
दर्द उठता है तो बस ये ही दुआ करता हूं
तेरे दिल में मेरे खातिर कोई भी जख्म न हो
जिन चिरागों को जलाने कि लिए आग नहीं
उनकी लाशों पर कभी जुगनुओं का जश्न न हो
जिंदगी तुमसे मेरा खून का रिश्ता है मगर
फिर से मेरा ऐसे रिश्तों में कभी जन्म न हो
मौत आए भी तो तुझे देखने की जिद खत्म न हो
दर्द उठता है तो बस ये ही दुआ करता हूं
तेरे दिल में मेरे खातिर कोई भी जख्म न हो
जिन चिरागों को जलाने कि लिए आग नहीं
उनकी लाशों पर कभी जुगनुओं का जश्न न हो
जिंदगी तुमसे मेरा खून का रिश्ता है मगर
फिर से मेरा ऐसे रिश्तों में कभी जन्म न हो
कब तक ऑंखें ही नाम करके हम शांत हो
कब तक ऑंखें ही नाम करके हम शांत हो
क्या
हमे जीने का हक नहीं है यहाँ क्यूँ नहीं सुन रहा
कोई आवाज को बोलने का हक हमे क्या नहीं है यहाँ
कल पढ़ा था हर कोई यहाँ आजाद है था
जहाँ ये लिखा वो संविधान है कहाँ बोलने की सजा अब
तो मौत मिल रही न्यायदाता धरा से गए अब कहाँ
दर्द माँ के शहीदों का वो जाने
क्या जिसने गीदड ही पैदा किये है
यहाँ लाल अपना जो खोते तो वो जानते
लाल खोके माँ कैसे है ज़िंदा यहाँ
हमे जीने का हक नहीं है यहाँ क्यूँ नहीं सुन रहा
कोई आवाज को बोलने का हक हमे क्या नहीं है यहाँ
कल पढ़ा था हर कोई यहाँ आजाद है था
जहाँ ये लिखा वो संविधान है कहाँ बोलने की सजा अब
तो मौत मिल रही न्यायदाता धरा से गए अब कहाँ
दर्द माँ के शहीदों का वो जाने
क्या जिसने गीदड ही पैदा किये है
यहाँ लाल अपना जो खोते तो वो जानते
लाल खोके माँ कैसे है ज़िंदा यहाँ
वो आ गया जिसका मुझे इंतजार था
वो आ गया जिसका मुझे इंतजार था
वो आ गया जिसके लिये ये दिल बेकरार था
वो आ गया मेरी सुनी जिंदगी मे रंग भरने
वो आ गया जीवनभर मेरे संग रहने
वो आ गया और उसके साथ वो बहार लौट आई
वो हसती - खिल्खीलाती फिजाये लौट आई
वो जिंदगी कि सुनी सदाये लौट आई
उसके बिना कितना सुना मेरा जहा था
ये बात ऐ जिंदगी मुझे आज समझ मे आई
कैसे वो पल गुजारे उसके बिना
कभी सुनी बगिया कि तरह
कभी मधुर संगीत के बिना
कभी सुनी डगर कि तरह
कभी रोशनी के बिना
पर आज कि ये घडी बडी खुशमिजास है
हम और वो
वो और हम
साथ - साथ है
अब खुदा से यही गुजारीश है
जीवनभर हमारा - तुम्हारा साथ रहे
काहीं थम ना जाये ये ख़ुशी का अहसास
ऐ खुदा तेरी दुआ हर वक़्त मेरे साथ रहे
तेरे विरह से जब रोती हैं आँखे
तेरे तसव्वुर से जब रोशन होती हैं आँखे
दूर होती है मुझसे और करतीं हैं तुझसे बातें....
तेरे चहरे को जब देखती हैं आँखे
स्मित मुस्कान लिए चमकती है आँखे....
तेरे विरह से जब रोती हैं आँखे
खुलती- बंद होती तड़पती मेरी आंखे....
तेरे सरुर से जब व्याकुल होती हैं आँखे
मिलने को तुझसे बरसती हैं आँखे....
तेरे अधरों को जब तकती हैं आँखे
पुलकित हो मन ही मन नाचती है आँखे....
तेरी आँखों से जब करतीं हैं बाते,, मेरी आँखे..
सलज्ज तेरे पलकों के भीतर सिमटती हैं मेरी आँखें
मन की आँखों से तुम्हे देखती
मन की आँखों से तुम्हे देखती हु,
तस्वीर की जरुरत नहीं,
तस्वीर तो हमेशा एक ही रूप में सिमट जाएगी,
पर मन की आँखे हर वक़्त तुम्हारी नयी तस्वीर
बनाएगी .
काश वादों का मतलब वो समझ पाते,
नजरे कहती है हजार बाते,
काश ! एक नजर को हमारी वो समझ पाते...



